वहाँ (कैलाश पर्वत) पर अवश्य ही देवाङ्गनाएँ कङ्गनों की नोकों के प्रहारों से जल बरसाने वाले तुमको फव्वारे के रूप में बना डालेंगी। हे मित्र! गर्मी से प्राप्त हुए तुम्हारा यदि उन (देवाङ्गनाओं) से छुटकारा न होवे (तो) क्रीड़ा में लगी हुई उनको कानों को कठोर लगने वाले गर्जनों से डरा देना।
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