मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 61
गत्वा चोर्ध्वं दशमुखभुजोच्छ्‌वासितप्रस्थसन्धेः कैलासस्य त्रिदशवनितादर्पणस्यातिथिः स्याः । शृङ्गोच्छ्रायैः कुमुदविशदैर्यो' वितत्य स्थितः खं राशीभूतः प्रतिदिनमिव त्र्यम्बकस्याट्टहासः ।।
और ऊपर को जाकर (तुम) दश मुख वाले (रावण) की भुजाओं द्वारा शिथिल किये शिखरों के जोड़ों वाले, देवताओं की स्त्रियों के दर्पण, कैलाश के अतिथि होना, कुमुद पुष्यों के समान श्वेत शिखरों की ऊँचाइयों से आकाश को व्याप्त करके स्थित हुआ जो (कैलाश) मानो, प्रतिदिन इकट्ठा हुआ शिव का अट्टहास (ठहाका) है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें