मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 6
जातं वंशे भुवनविदिते पुष्करावर्तकानां जानामि त्वां प्रकृतिपुरुषं कामरूपं मघोनः । तेनार्थित्वं त्वयि विधिवशाद् दूरबन्धुर्गतोऽहं याच्त्रा मोघा' वरमधिगुणे नाधमे लब्धकामा ॥
(हे मेघ!) तुमको संसार में प्रसिद्ध पुष्कर और आवर्तक (मेघों) के वंशो में उत्पन्न इन्द्र का इच्छानुसार रूप धारण करने वाला प्रधान पुरुष जानता हूँ। इसलिए दैवयोग से दूर स्थित बन्यु (प्रिया) वाला मैं (यक्ष) तुम्हारे विषय में याचकत्व को प्राप्त हुआ हूँ। अधिक गुण वाले से (की गयी) याचना निष्फल (भी) अच्छी (है), (परन्तु) निर्गुण से (की गयी) याचना सफल कामना वाली (भी अच्छी) नहीं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें