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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 59
शब्दायन्ते मधुरमनिलैः कीचकाः पूर्यमाणाः संरक्ताभिस्त्रिपुरविजयो गीयते किन्नरीभिः । निर्हादन्ते मुरज इव चेत्कन्दरेषु ध्वनिः स्यात् संगीतार्थो ननु पशुपतेस्तत्र भावी समग्रः ।॥
वायु से भरे हुए बाँस मधुर शब्द करते हैं, प्रेम से भरी हुई किन्नर स्त्रियां त्रिपुर विजय का गान गाती है, यदि गुफाओं में तुम्हारा गर्जन नगाड़े के शब्द के समान हो जाये (तो) वहाँ शिव के संगीत की सामग्री निश्चय ही पूर्ण हो जायेगी।
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