देवों के हाथी के समान आकाश में पिछले आये भाग (के सहारे) से लटके हुए तुम यदि उसके (गङ्गा के) स्वच्छ स्फटिक के समान निर्मल जल को तिरछे होकर पीने का विचार करोगे तो वह (गङ्गा) तुरन्त ही प्रवाह में साथ-साथ चलती हुई आपकी परछाईं से, (प्रयाग से) भिन्न स्थान में यमुना सङ्गम को प्राप्त हुई-सी सुन्दर हो जायेगी।
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