वहाँ से (कुरुक्षेत्र से) कनखल के समीप पर्वतराज (हिमालय) से उतरी हुई, सगर के पुत्रों के लिए स्वर्ग की सीढ़ी, जहनु की पुत्री गङ्गा पर जाना। पार्वती के मुख पर धूभङ्ग का झागों से मानो उपहास करके चन्द्रमा में लगे तरंग रूपी हाथ वाली जिस (गङ्गा) ने शिव के बालों को पकड़ा था।
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