बन्धुओं के स्नेह के कारण युद्ध से पराङ्मुख, हल धारण करने वाले (बलराम) ने अभीष्ट स्वाद वाली और रेवती की आँखों के प्रतिबिम्व वाली मदिरा को छोड़कर जिस (जल) का सेवन किया था, उस सरस्वती नदी के जलों को प्राप्त करके तुम भी हृदय से शुद्ध हो जाओगे, केवल रंग से ही श्याम (रहोगे)।
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