उस (चर्मण्वती) को पार करके अपने स्वरूप को, भौंहरूपी लताओं के विलास से परिचित, पलकों को ऊपर उठाने से, ऊपर शोभायमान् श्याम श्वेत तथा लाल कान्ति से युक्त (और) कुन्द पुष्पों के हिलने-डुलने का अनुसरण करने वाले भौरों की शोभा को चुराने वाले, दशपुर की स्त्रियों के नयनों को कौतूहलों का पात्र बनाते हुये जाना।
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