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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 50
तामुत्तीर्य व्रज परिचितभूलता विघ्नमाणां पक्ष्मोत्क्षेपादुपरिविलसत्कृष्णशारप्रभाणाम् । कुन्दक्षेपानुगमधुकर श्रीमुषामात्मबिम्बं पात्रीकुर्वन्दशपुरवधूनेत्रकौतूहलानाम् ।।
उस (चर्मण्वती) को पार करके अपने स्वरूप को, भौंहरूपी लताओं के विलास से परिचित, पलकों को ऊपर उठाने से, ऊपर शोभायमान् श्याम श्वेत तथा लाल कान्ति से युक्त (और) कुन्द पुष्पों के हिलने-डुलने का अनुसरण करने वाले भौरों की शोभा को चुराने वाले, दशपुर की स्त्रियों के नयनों को कौतूहलों का पात्र बनाते हुये जाना।
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