मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 5
घूमज्योतिः सलिलमरुर्ता सन्निपातः क्व मेघः सन्देशार्थाः क्व पटुकरणैः प्राणिभिः प्रापणीयाः। इत्यौत्सुक्यादपरिगणयन् गुह्यकस्तं ययाचे कामार्ता हि प्रकृतिकृपणाश्चेतनाचेतनेषु ॥
धूम, अग्नि, जल और वायु का मिश्रण मेघ कहाँ? और समर्थ इन्द्रियों वाले प्राणियों द्वारा भेजे जाने योग्य सन्देश रूपी वस्तु कहाँ? इसका उत्कण्ठा के कारण विचार न करते हुए यक्ष ने उस (मेघ) से याचना की, क्योंकि कामपीड़ित (व्यक्ति) चेतन और जड़ के विषय में स्वभाव से दीन (विवेकशून्य) (होते हैं)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें