धूम, अग्नि, जल और वायु का मिश्रण मेघ कहाँ? और समर्थ इन्द्रियों वाले प्राणियों द्वारा भेजे जाने योग्य सन्देश रूपी वस्तु कहाँ? इसका उत्कण्ठा के कारण विचार न करते हुए यक्ष ने उस (मेघ) से याचना की, क्योंकि कामपीड़ित (व्यक्ति) चेतन और जड़ के विषय में स्वभाव से दीन (विवेकशून्य) (होते हैं)।
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