वहाँ (सन्ध्या-समय में) पैरों की गति के साथ बजती हुई करधनियों वाली, विलासपूर्वक डुलाये हुए, रत्नों की कान्तियों से विभूषित दण्डों वाले चैवरों से थके हुए हाथों वाली वेश्यायें तुमसे नखक्षतों को सुख देने वाली वर्षा की प्रथम बूँदों को प्राप्त करके तुम पर भ्रमरों की पंक्तियों के समान लम्बे कटाक्षों को छोड़ेंगी।
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