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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 34
प्रद्योतस्य प्रियदुहितरं वत्सराजोऽत्र जहे हैमं तालद्रुमवनमभूदत्र तस्यैव राज्ञः । अत्रोद्घान्तः किल नलगिरिः स्तम्भमुत्पाट्य दर्पादित्यागन्तून् रमयति जनो यत्र बन्धूनभिज्ञः ॥
यहाँ (उज्जयिनी में) वत्सदेश के राजा (उदयन) ने प्रद्योत की प्रिय पुत्री (वासवदत्ता) का अपहरण किया था, यहाँ उसी राजा (प्रद्योत) का स्वर्णमय ताल (ताड़) वृक्षों का वन था, यहाँ नलगिरि नामक हाथी मद से खम्बे को उखाड़कर घूमता फिरा। इस प्रकार (पुरानी कथाओं के) जानकार लोग बाहर से आये हुये बसुओं का मनोरंजन करते हैं।
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