जिस (उज्जयिनी) में करोड़ों की संख्या में बाजारों में (बिक्री के लिए) सजाये गये, शुद्ध मध्यमणि वाले हारों को, शङ्ख और सीपियों को, घास के समान हरे, अङ्कुरों के समान ऊपर को उठी हुई किरणों से चमकती हुई मरकत मणियों को और मूंगों के टुकड़ों को देखकर समुद्र केवल जलमात्र शेष रह गया हो, (ऐसा) दिखायी देता है।
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