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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 31
प्राप्यावन्तीनुदयनकथांकोविदग्रामवृद्धान् पूर्वोद्दिष्टामुपसर पुरीं श्रीविशालां विशालाम् । स्वल्पीभूते सुचरितफले स्वर्गिणां गां गतानां शेषैः पुण्यैर्हतमिव दिवः कान्तिमत्खण्डमेकम् ॥
जहाँ के ग्रामों के वृद्ध जन उदयन की कथाओं के जानने वाले हैं, ऐसे अवन्ति प्रदेश को प्राप्त कर, पहले बतायी गयी, सम्पति से सम्पन्न, उज्जयिनी नाम की नगरी में जाना, (जो) मानो पुण्य कर्मों के फल के कम हो जाने पर पृथ्वी पर आये हुए स्वर्ग वालों के (देवताओं के) शेष पुण्यों के द्वारा लाया गया स्वर्ग का एक उज्जवल टुकड़ा है।
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