यक्षों के राजा (कुबेर) का सेवक अन्दर ही आँसुओं को रोके हुए, उत्कण्ठा को उत्पन करने वाले उस (मेघ) के सामने किसी प्रकार ठहर कर देर तक सोचता रहा। मेघ के दर्शन होने पर सुखी (व्यक्ति) का भी चित्त दूसरे प्रकार की वृत्ति वाला (चंचल) हो जाता है, (फिर) कण्ठ के आलिङ्गन के इच्छुकजन (प्रिया) के दूर स्थित होने पर तो कहना ही क्या।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मेघदूतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मेघदूतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।