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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 22
अम्भोबिन्दुग्रहणचतुरांश्चातकान्' वीक्षमाणाः श्रेणीभूताः परिगणनया निर्दिशन्तो बलाकाः । त्वामासाद्य स्तनितसमये मानयिष्यन्ति सिद्धाः प्रियसहचरीसंभ्रमालिङ्गितानि ॥
जल-बिन्दुओं के ग्रहण करने में निपुण चातकों को देखते हुए, पंक्तिबद्ध बगुलों को गिनती के द्वारा (अङ्गु‌लियों से) दिखाते हुए, सिद्ध लोग गर्जन के समय कँपकँपी सहित प्रिय पलियों द्वारा घबराहट से (किये गये) आलिङ्गनों को पाकर तुम्हारे प्रति कृतज्ञ होंगे।
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