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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 18
छन्नोपान्तः परिणतफलद्योतिभिः काननाम्मै स्त्वय्यारूढे शिखरमचलः स्निग्धवेणीसवर्णे । नूनं यास्यत्परमिथुनप्रेक्षणीयामवस्थां मध्ये श्यामः स्तन इव भुवः शेषविस्तारपाण्डुः ।।
पके हुए फलों से चमकते हुए वन के आमों से ढके हुए पार्श्व भागों वाला (आग्नकूट) पर्वत, चिकनी चोटी के समान रंग वाले तुम्हारे चोटी पर चढ़ने पर, मध्य भाग में काला तथा शेष विस्तार भाग पीला-सा, पृथिवी के स्तन के समान (होकर), निश्चय ही देवों के जोड़ों द्वारा देखने योग्य अवस्था को प्राप्त करेगा।
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