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मेघदूतम् • अध्याय 1 • श्लोक 10
मन्दं-मन्दं नुदति पवनश्चानुकूलो यथा त्वां वामश्चार्य नदति मधुरं चातकस्ते सगन्धः । गर्भाधानक्षणपरिचयान्नूनमाबद्धमालाः सेविष्यन्ते' नयनसुभगं' खे भवन्तं बलाकाः ॥
और जैसे कि अनुकूल वायु तुम्हें धीरे-धीरे प्रेरित कर रहा है तथा गर्व से भरा यह पपीहा तुम्हारे वाम भाग में स्थित होकर मधुर शब्द कर रहा है। निश्चय ही गर्भ धारण करने के आनन्द के अभ्यास के कारण पंक्तिबद्ध बगुलियाँ नेत्रों को सुन्दर लगने वाले आपकी आकाश में सेवा करेंगी।
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