आददीत न शूद्रो$पि शुल्कं दुहितरं ददन् ।
शुल्क हि गृह्णन्कुरुते छन्नं दुहितृविक्रयम् ।।
कन्या-दान करता हुआ (शास्त्र-ज्ञान हीन) शूद्र भी (मूल्य आदि रूप में कोई) धन पति से न लेवे (जब शूद्र तक के लिए निषेध है तो द्विज को तो कन्या का मूल्य कदापि नहीं लेना चाहिए); क्योंकि पति से धन लेता हुआ (पिता आदि कन्याभिभावक) छिपकर कन्या को बेचता है।
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