पति (सूर्य आदि) देवों के द्वारा ही दी गयी स्त्री को प्राप्त करता है, अपनी इच्छा से नहीं प्राप्त करता, अतएव (उन) देवों का प्रिय करता हुआ (वह पति) उस सदाचारिणी स्त्री का अन्न, वस्त्र तथा आभूषण आदि से सर्वदा पोषण करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।