अलङ्कारं नाददीत पित्र्यं कन्या स्वयम्वरा ।
मातृक भ्रातृदत्तं वा स्तेना स्याद्यदि तं हरेत् ।।
उक्त नियम (९।९०) के अनुसार पति का स्वयं वरण करनेवाली कन्या पिता, भाई, माता (या अन्य किसी अभिभावक) के दिये हुए अलङ्कारों को न लेवे, (किन्तु उन्हें वापस लौटा दे), यदि वह (पिता आदि के दिये हुए अलङ्कार को) लेती है तो चोर होती है।
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