कन्या ऋतुमती होने पर तीन वर्ष तक (पिता आदि के योग्यतर पति के लिए दान करने की) प्रतीक्षा करे, इसके बाद (योग्यतर पति नहीं मिलने पर) समान योग्यता वाले भी पति को स्वयं वरण कर ले।
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