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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 88
उत्कृष्टायाभिरूपाय वराय सदृशाय च। अप्राप्तामपि तां तस्मै कन्यां दद्याद्यथाविधि ।।
(कुल तथा आचार में) श्रेष्ठ, सुन्दर और योग्य वर मिल जाय तो (पिता या अन्य अभिभावक आदि) कन्या की अवस्था (आयु) विवाह योग्य न होने पर भी अर्थात्‌ 'दक्ष' के वचनानुसार आठ वर्ष से कम आयु रहने पर भी उस कन्या को उस वर के लिए ब्राह्मविधि (३।३७) से दान (विवाहित) कर दे।
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