जो पति सजातीय (समान जातिवाली) स्त्री के सन्निहित रहने पर मोहवश विजातीय (दूसरी जातिवाली) स्त्री द्वारा शरीर-सेवादि कार्य करवाता है, वह ब्राह्मण चाण्डाल (ब्राह्मणी स्त्री में शूद्र पति से उत्पन्न पुत्र के तुल्य) प्राचीन ऋषियों द्वारा देखा (माना) जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।