उन (सजातीय तथा विजातीय स्त्रियों) में भोजन आदि देकर पतिक सेवा तथा नित्य (भिक्षादान, अतिथिभोजन, अग्निहोत्रकर्म आदि) धर्म कार्य सजातीय (समान जातिवाली ही) स्त्री करे, अन्य जातिवाली स्त्री कदापि न करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।