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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 85
यदि स्वाश्चापराश्चैव विन्देरन्योषितो द्विजाः । तासां वर्णक्रमेण स्याज्ज्यैष्ठ्यं पूजा च वेश्म च ।।
यदि द्विज सजातीय (समान जातिवाली) तथा विजातीय (भिन्न जातिवाली) स्त्रियो के साथ विवाह कर ले तो उनके वर्ण-क्रम के अनुसार भाषण, दान, (भाग हिस्सा), वस्त्र-आभूषण आदि से सत्कार तथा (निवास के लिए) घर होते हैं अर्थात्‌ उच्च वर्ण वाली पत्नी के लिए श्रेष्ठ तथा हीनवर्ण वाली पत्नी के लिए उसकी अपेक्षा हीन वे सब प्राप्त होते हैं।
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