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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 84
प्रतिषेधे पिवेद्या तु मद्यमभ्युदयेष्वपि । प्रेक्षासमाजं गच्छेद्वा सा दण्ड्या कृष्णलानि षट्‌ ।।
जो (क्षत्रिया आदि) स्त्री (पति आदि स्वजनों के) मना करने पर भी विवाहादि उत्सवों में भी (निषिद्ध मद्य का पान करे अथवा सबके सामने नाचने गाने आदि में सम्मिलित हो) तब राजा उसे ६ कृष्णल (रत्ती) सुवर्ण से दण्डित करे।
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