अधिविन्ना तु या नारी निर्गच्छेद्रुषिता गृहात् ।
सा सद्यः सन्निरोद्धव्या त्याज्या वा कुलसन्निधौ ।।
उक्त (९1८०-८१) अवस्था में पति के दूसरा विवाह करने पर जो स्त्री कुपित होकर घर से निकल जाय (या निकलना चाहे) तो पति उसे (क्रोध शान्त होने तक रस्सी आदि से) बाँधकर रोके अथवा पिता आदि के पास पहुँचा कर छोड़ दे।
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