या रोगिणी स्यात्तु हिता सम्पन्ना चैव शीलतः ।
सानुज्ञाप्या5धिवेत्तव्या नावमान्या च कर्हिचित् ।।
जो स्त्री रोगिणी हो परन्तु पति की हिताभिलाषिणी तथा शीलवती हो, पति उससे सम्मति लेकर दूसरा विवाह करे तथा उसका अपमान कदापि न करे।
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