मद्यपाऽसत्यवृत्ता च प्रतिकूला च या भवेत् ।
व्याधिता वाऽधिवेत्तव्या हिंस्राऽर्थघ्नी च सर्वदा ।।
(निषिद्ध) मद्यपान करनेवाली, दुराचारवाली (पति के) प्रतिकूल रहने वाली, (कुष्ठ यक्ष्मा आदि) रोगवाली, (दास-दासी आदि को सदा) मारने या फटकारनेवाली और अधिक धन-व्यय करनेवाली स्त्री हो पति उसके जीवित रहने पर भी दूसरा विवाह कर ले।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।