पति वीर्यरूप से स्त्री में प्रवेशकर गर्भ होकर पुत्ररूप से उत्पन्न होता है, जाया (स्त्री) का वही जायात्व (स्त्रीपन) है; जो इस (स्त्री) में (पुत्र रूप से पति) पुनः उत्पन्न होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।