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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 78
अतिक्रामेत्प्रमत्तं या मत्तं रोगार्तमेव वा। सा त्रीन्मासाऱ्परित्याज्या विभूषणपरिच्छदा ।।
जो स्त्री (जुआरी आदि होने से) प्रमादयुक्त, (मदपान आदि से) मतवाले तथा रोग से पीड़ित पति की उपेक्षा (सेवा आदि न) करे, पति उसका भूषण आदि लेकर तीन माह तक त्याग कर दे (उसके साथ सहवाह न करे)।
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