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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 77
संवत्सरं प्रतीक्षेत द्विषाणां योषितं पतिः । ऊर्ध्व संवत्सरात्त्वेनां दायं हृत्वा न संवसेत्‌ ।।
पत्नी अपने (पति के) साथ द्वेष करने वाली स्त्री की एक वर्ष तक (उसके सुधार द्वेष त्याग के लिए) प्रतीक्षा करे, इसके बाद उसके लिए दिये गये भूषण आदि को उससे लेकर उसके साथ सहवास करने का त्याग कर दे, (किन्तु आभरण लेकर भी उसके भोजन वस्त्र की व्यवस्था तो करे ही)।
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