स्त्री धर्मकार्यार्थ परदेश गये हुए पति की आठ वर्ष तक, विद्या (पढ़ने) या (विद्यादि गुण-प्रचार के द्वारा) यश के लिए परदेश गये हुए पति की छः वर्ष तक और भोग आदि अन्य साधनों के लिए परदेश गये हुए पति की तीन वर्ष तक प्रतीक्षा करे (इसके बाद वह स्त्री पति के पास चली जावे)।
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