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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 75
विधाय प्रोषिते वृत्तिं जीवेन्नियममास्थिता । प्रोषिते त्वविधायैव जीवेच्छिल्पैरगर्हितैः ।।
जीविका (भोजन, वस्त्र आदि) का प्रबन्ध कर पति के परदेश जाने पर स्त्री नियम पालती (शृङ्गार, परगृहगमन आदि का त्याग करती) हुई जीए तथा (भोजन, वस्त्र आदि का) प्रबन्ध किये विना ही पति के परदेश चले जाने पर स्त्री अनिन्दित शिल्प (सीना, पिरोना, सूत कातना आदि कार्यों) से जीए।
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