जीविका (भोजन, वस्त्र आदि) का प्रबन्ध कर पति के परदेश जाने पर स्त्री नियम पालती (शृङ्गार, परगृहगमन आदि का त्याग करती) हुई जीए तथा (भोजन, वस्त्र आदि का) प्रबन्ध किये विना ही पति के परदेश चले जाने पर स्त्री अनिन्दित शिल्प (सीना, पिरोना, सूत कातना आदि कार्यों) से जीए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।