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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 71
न दत्वा कस्य चित्कन्यां पुनर्दद्याद्विचक्षणः । दत्वा पुनः प्रयच्छन्‌ हि प्राप्नोति पुरुषानृतम्‌ ।।
चतुर (शास्त्रज्ञानी मनुष्य) कन्या का किसी के लिए वाग्दानकर उस पति के मर जाने पर पुनः उस कन्या के लिए दे; क्योंकि उक्त कन्या को दूसरे पति के लिए देता हुआ वह 'पुरुषानृत' दोष को प्राप्त करता है और 'सहस्रं त्वेव चोत्तमः' (८।१३८) में कथित दण्ड का भागी होता है।
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