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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 70
यथाविध्यधिगम्यैनां शुक्लवस्त्रां शुचिव्रताम् । मिथो भजेताप्रसवात्सकृत्सकृदृतावृतौ ।।
वह देवर (वाग्दत्त कन्या के मृत पति का सहोदर छोटा भाई) विधिपूर्वक इसे स्वीकारकर (कायिक, वाचिक और मानसिक) शुद्धिवाली उस (वाग्दत्ता मृतपति कन्या) के साथ प्रत्येक ऋतुकाल में १-१ बार गर्भ धारण होने तक सम्भोग करे।
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