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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 67
स महीमखिलां भुञ्जन् राजर्षिप्रवरः पुरा । वर्णानां सङ्करं चक्रे कामोपहतचेतनः ।।
समस्त पृथ्वी का पालन करते हुए राजर्षिप्रवर वेन ने काम से नष्ट बुद्धि होकर मनुष्यों को) भाई की स्त्री के साथ सम्भोग का नियम चालू कर) वर्ण सङ्कर बनाया।
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