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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 65
नोद्वाहिकेषु मन्त्रेषु नियोगः कीर्त्यते क्वचित् । न विवाहविधावुक्तं विधवावेदनं पुनः ।।
विवाह सम्बन्धी किन्हीं मन्त्रों में किसी भी शाखा में नियोग को नहीं कहा गया है और न विवाह की विधि में विधवा को पुनः देने (दूसरे पुरुष के साथ पुनर्विवाह करने) को ही कहा गया है।
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