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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 63
नियुक्तौ यौ विधिं हित्वा वर्तेयातां तु कामतः । तावुभौ पतितौ स्यातां स्नुषागगुरुतल्पगौ ।।
जो नियुक्त छोटा या बड़ा भाई परस्पर की स्त्री के साथ विधि (९८६० में वर्णित समस्त अङ्गों में घृतलेपन, मौन तथा रात्रिकाल) को छोड़कर कामवशीभूत हो सम्भोग करते हैं, वे दोनों (बड़ा भाई तथा छोटा भाई क्रमशः) स्नुषासम्भोग तथा गुरुपत्नी-सम्भोग के पापभागी होकर पतित हो जाते हैं।
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