जो नियुक्त छोटा या बड़ा भाई परस्पर की स्त्री के साथ विधि (९८६० में वर्णित समस्त अङ्गों में घृतलेपन, मौन तथा रात्रिकाल) को छोड़कर कामवशीभूत हो सम्भोग करते हैं, वे दोनों (बड़ा भाई तथा छोटा भाई क्रमशः) स्नुषासम्भोग तथा गुरुपत्नी-सम्भोग के पापभागी होकर पतित हो जाते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।