विधवा (९।६० का विमर्श देखें) में नियोग के उद्देश्य (गर्भधारण आदि) के विधिवत् पूरा हो जाने पर (बड़े भाई तथा छोटे भाई की स्त्री से क्रमशः) गुरु तथा स्नुषा (पुत्रवधू) के समान परस्पर बर्ताव करे।
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