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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 60
विधवायां नियुक्तस्तु घृताक्तो वाग्यतो निशि । एकमुत्पादयेत्पुत्रं न द्वितीयं कथञ्चन ।।
विधवा स्त्री में पति या गुरु से नियुक्त देवर या सपिण्ड पुरुष सम्पूर्ण शरीर में घी लगाकर तथा मौन होकर रात में (सम्भोग करके, एक पुत्र को उत्पन्न करे, द्वितीय पुत्र को कदापि उत्पत्र नहीं करे)।
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