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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 6
इमं हि सर्ववणानां पश्यन्तो धर्ममुत्तमम्‌ । यतन्ते रक्षितुं भार्या भर्तारो दुर्बला अपि ।।
(ब्राह्मण-क्षत्रियादि) समस्त वर्णो के इस उत्तम धर्म को देखते हुए दुर्बल (अन्धे, लंगड़े, रोगी, निर्धन आदि) पति भी स्त्री की रक्षा करने के लिए यत्न करते हैं।
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