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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 57
भ्रातुर्येष्ठस्य भार्या या गुरुपल्यनुजस्य सा । यवीयसस्तु या भार्या स्नुषा ज्येष्ठस्य सा स्मृता ।।
बड़े भाई की स्त्री छोटे भाई की गुरुपत्नी (के तुल्य) होती है और छोटे भाई की स्त्री बड़े भाई की स्नुषा (पुत्र वधू अर्थात् पतोहू के तुल्य) होती है।
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