एष धर्मो गवाश्वस्य दास्युष्ट्राजाविकस्य च ।
विहङ्गमहिषीणां च विज्ञेयः प्रसवं प्रति ।।
यही (९/४९-५४ में कथित) व्यवस्था गाय, घोड़ा दासी, बकरी, भेड़, पक्षी और भैंस की सन्तान के प्रति भी जाननी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।