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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 52
फलं त्वनभिसंधाय क्षेत्रिणां बीजिनां तथा । प्रत्यक्षं क्षेत्रिणामर्थो बीजाद्योनिर्बलीयसी ।।
खेतवाला और बीज बोनेवाला ये दोनों परस्पर में फल उत्पन्न होने के कारण अन्न-फल आदि के विषय में नियम (इस खेत में तुम्हारे बीज होने पर जो अन्न उत्पन्न होगा, वह हम दोनों का होगा, ऐसी शर्त) नहीं करे तो उस खेत में उत्पन्न (अन्न-फल आदि) खेत वाले का होता है; क्योंकि बीज की अपेक्षा क्षेत्र (खेत) ही प्रधान है (यही नियम सन्तानोत्पत्ति के विषय में भी जानना चाहिये)।
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