उसी प्रकार (स्त्रीरूप) क्षेत्र का स्वामी नहीं होते हुए जो पुरुष दूसरे के (स्त्रीरूपी), क्षेत्र में बीज बोते (वीर्यक्षरण) करते हैं, वे बीजवाला (परस्त्री में वीर्यक्षरण करने वाला पुरुष, सन्तानरूपी) फल को नहीं प्राप्त करता।
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