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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 50
यदन्यगोषु वृषभो वत्सानां जनयेच्छतम् । गोमिनामेव ते वत्सा मोघं स्कन्दितमार्षभम् ।।
जो दूसरों की गाय में साँड़ सैकड़ों बछड़ों को उत्पन्न कर दे, वे सब बछड़े गाय के स्वामी के ही होते हैं (और साँड़ के स्वामी के नहीं होते, अतः) साँड़ का वीर्यक्षरण करना व्यर्थ है।
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