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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 48
क्षेत्र प्राधान्य में अन्य दृष्टान्त- यथा गोश्वोष्ट्रदासीषु महिष्यजाविकासु च । नोत्पादकः प्रजाभागी तथैवान्याङ्गनास्वपि ।।
जिस प्रकार गाय, घोड़ी, ऊँटिनी, दासी, भैंस, बकरी और भेंड़ में उत्पत्र सन्तान को पाने का अधिकारी सन्तानोत्पादक. नहीं होता (किन्तु उक्त गाय आदि का स्वामी ही होता है), उसी प्रकार दूसरे पुरुष की स्त्रियों में उत्पादित सन्तान को पाने का अधिकारी (उन स्त्रियों का) पति ही होता है; (उत्पत्र करने वाला दूसरा पुरुष नहीं)।
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