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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 46
विक्रय या त्याग से स्त्रीत्व से अमूक्ति- न निष्क्रयविसर्गाभ्यां भर्तुर्भार्या विमुच्यते । एवं धर्म विजानीमः प्राक्प्रजापतिनिर्मितम् ।।
'बेचने या त्याग करने से स्त्री पति के स्त्रीत्व से मुक्त नहीं होती' पहले ब्रह्मा के बनाये हुए ऐसे धर्म को हम जानते हैं। (अतएव पति स्त्री को छोड़ दे या द्रव्य लेकर बेच दे तब भी उस स्त्री में परपुरुषोत्पादित सन्तान पति की ही होती है; सन्तानोत्पादक दूसरे पति की नहीं)।
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