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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 45
एतावानेव पुरुषो यज्जायात्मा प्रजेति ह । विप्राः प्राहुस्तथा चैतद्यो भर्ता सा स्मृताङ्गना ।।
केवल पुरुष कोई वस्तु नहीं होता अर्थात् अपूर्ण ही रहता है, किन्तु स्त्री, स्वदेह तथा सन्तान - ये तीनों मिलाकर ही पुरुष (पूर्णरूप) होता है, ऐसा (वेदज्ञाता) ब्राह्मण कहते हैं। और जो पति है वही स्त्री है, अतएव उस स्त्री में (परपुरुष से भी) उत्पन्न सन्तान उस स्त्री के पति की ही होती है।
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